लहराये तिरंगा

*आशुतोष

लहराये तिरंगा

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लहराये अपना तिरंगा

बरसते रहे यूँ ही फूल

चमन की शांति बनी रहे

तिरंगा की है दस्तूर।

 

नमन है धरती पावन

खिलते है चमन में फूल

है वतन प्यारी अपनी

निकाल डालूँगा इस चमन से शूल।

 

वतन के है सच्चे सिपाही

चमन के रखवाले यही

खिलते है रोज फूल यहाँ

वतन करता नाज वहाँ।

 

खिले खिले चमन में

लाखो है रंग विरंगे

नमन है उनको बारंबार।

जो रखते वतन को चंगे।

                                 

माँ तुझे सलाम

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नागरिक हूँ अपने देश का 

वतन को प्यार करता हूँ

भारत माँ के चरणों में 

बन्दन बार बार करता हूँ।

 

रहेगा सलामत जब तक 

यह शरीर अपना

सुबह शाम नित ही 

तिरंगे को सलाम करता हूँ।

 

आन बान शान है 

हम सब की यह पहली माँ है

शीश नवाता हूँ चरणो में तेरे 

मगर दुश्मनों के ऑखो में आँखे 

डाल बात करता हूँ।

 

रहेगी जब तलक धरती 

प्यार इसी तरह मिलती रहेगी

हर जवा बूढे बच्चे की जुवाँ 

माँ तुझे सलाम करती रहेगी।

 

*आशुतोष

पटना बिहार