Subscribe Us

header ads

क्यों न रणछोड़ बन जाए


*मीरा सिंह "मीरा"

हां, वक्त की यही मांग है कि हम सब रणछोड़ बन जाए।भगवान श्रीकृष्ण की तरह कोरोनासुर से जीतने के लिए यही सर्वश्रेष्ठ उपाय है।इक्कीस दिनों के लिए देशबंदी का अर्थ समझने का प्रयास कीजिए।रोजाना अरबों रुपए का नुकसान उठाने के लिए देश क्यों तैयार हुआ?दिमाग पर जोर डालिए।यह सारे कठोर फैसले हमारे लिए, आप के लिए, हर देशवासी की स्वास्थ्य के मद्देनजर लिए गए ।अरे भाई सुनिए,कहां चल दिए?यह रवैया ठीक नहीं।ऐसी बेफिक्री ठीक नहीं।अरे भाई सुनिए, सड़कों पर बेवजह मत टहलिए। देश बंदी का अर्थ क्या नहीं समझ पा रहे हैं? यह लॉकडाउन आप के भले के लिए है ।आपके परिजनों के भले के लिए है। मानव मात्र के भले के लिए है। देश हित में है ।हालात की गंभीरता क्यों नहीं समझ रहे? क्या आप नहीं जानते हम और आप ही नहीं, यह सारी दुनिया एक अनदेखे दुश्मन से युद्ध करने के लिए विवश है। जाने अनजाने, चाहे अनचाहे हम सब अपने एकमात्र दुश्मन कोरोना से हाथापाई कर रहे हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हम सभी की आंखों पर पट्टी बांध दी गई है।

 

हम यह तो जानते हैं कि हमारा दुश्मन आस-पास ही है। पर कहां है? किस रूप में है? किसके वेश में है? हम नहीं जानते।उसके गोरिल्ला युद्ध नीति से हम परेशान ही नहीं हैं ,पस्त भी हैं।घनघोर संकट की घड़ी है।कई देश उसके शक्ति के सामने घुटने टेकने की स्थिति में हैं। पर हारेंगे नहीं ।हर  कदम  सोच समझ कर,फूंक फूंक कर रखना है।एक रणनीति के तहत काम करना है। शत्रु विशेष है ।इसलिए इस युद्ध के नियम भी विशेष होंगे। हम समझ चुके हैं कि प्रत्यक्ष प्रहार से शत्रु का बाल बांका भी नहीं होगा इसलिए भगवान श्री कृष्ण की तरह हमें भी रणछोड़ होना पड़ रहा है।घर के बाहर, मोहल्ले में, शहर में, गांव में ,यह कहां खड़ा है? हम नहीं जानते हैं। हमें जीतने के लिए अब अपने आप को, अपने घरों में बंद करना ही एकमात्र विकल्प है।अपने लिए, अपनों के लिए हम सबको नजर बंद होना ही होगा।यही नहीं, अपने घर के आगे लक्ष्मण रेखा भी खींचना होगा।सपरिवार संकल्प लेना होगा कि हम उस लक्ष्मण रेखा को पार नहीं करेंगे।कम से कम तब तक, जब तक कि यह दुश्मन को पस्त नहीं कर दें। जब तक हम खुद को लाॅक नहीं करेंगे, हम अपने शत्रु को परास्त नहीं कर सकते हैं ।आप नजर दौड़ाकर देखिए ।

 

परिस्थितियां दिनोंदिन बिगड़ती जा रही हैं।सच मानिए, हम तीसरे विश्वयुद्ध के सेनानी बन चुके हैं।समूचे विश्व का दुश्मन एक है पर वह अकेला ही सब पर भारी पड़ रहा है।इससे पहले कि हम लोग इस युद्ध के नियम समझें,अचानक हम पर हमला हो गया है। इससे पहले कि हम कुछ समझे, अपने लोगों को इस अनजान हमले से आगाह करें,हम चक्रव्यूह में घिर गए ।हालात की गंभीरता को समझे, अन्यथा  परिणाम बहुत भयंकर होंगे ।इतना भयंकर कि आप सोच भी नहीं सकते। महाविनाश के पहले संभल जाए ।यही बेहतर होगा।  सरकार कह रही है कि सोशलडिस्टेंशिग बनाए। घर के बाहर बेवजह मत निकालिए।आप क्यों नहीं समझ रहे।आपसे बेहतर  तो इस दौर के बच्चे हैं जो गलियों में धमाचौकड़ी मचाने के बदले घरों में दुबक गए।आप समझते ही नहीं।हाथ जोड़कर फिर गुजारिश है भाई साहब मान जाइए ।घर के बाहर मत निकालिए। अरे भाई अनकहे शब्दों के अर्थ समझिए। हालात अच्छे नहीं है।आपकी थोड़ी सी लापरवाही, थोड़ी बेफिक्री हमें मौत के मुंह में डाल देगी ।कितने लोगों को बर्बाद कर डालेगी,आप नहीं समझ पा रहे हैं।हाल के कुछ  गलतियों को याद कीजिए। इटली को देखिए ।अब अमेरिका को देखिए ।इसीलिए कह रहे हैं कि मन में गांठ बांध ले ।चूंकि  अब तक के हुए युद्धों से  यह युद्ध अलग है ।इसके नियम और कायदे कानून भी सबसे अलग है। हमारी लापरवाही ही दुश्मन की शक्ति है। इसमें हमें एकजुट रहना है लेकिन सिर्फ मन से और संकल्प से।अर्थात एक साथ खड़ा होना इसमें वर्जित है। यही नहीं इसमें आस-पड़ोस और समुदाय से भी कट कर रहने की अनिवार्यता है। इसके पहले जो भी युद्ध हुए, उसमें हमारी सेनाएं युद्ध लड़ी थी।पर इस युद्ध में सेना नहीं, हम सब सेनानी हैं। अपने-अपने घरों में कैद रखकर इसमें मोर्चा लेना है ।भगवान श्री कृष्ण की तरह रणछोड़ बनकर इस युद्ध को जीतना है। ध्यान रखना है कि कोरोना हमें स्पर्श ना करें।ध्यान रहे, घर के बाहर कहीं भी किसी अपने के रूप में कोरोना हमें छल सकता है। इसलिए हमें अपने मित्रों से भी दूरी बना कर रखना है। आज गलियां सड़कें सूनी हो चुकी हैं ।जो नादान लोग सड़कों पर घूम रहे हैं, उन्हें भी अपने घरों के अंदर जाकर दुबक कर बैठ जाना चाहिए ।सावधान,  द मोस्ट पावरफुल जायंट कोरोना राउंड पर है। जिसको भी बाहर देखेगा उसे धर दबोचा। सब लोग देखते रहेंगे,पर कोई नहीं बचा पाएगा। सरकार पूरी शक्ति झोककर भी नहीं बचा पाएगी क्योंकि यह दुश्मन शांति वार्ता नहीं करता।फिर कह रहे हैं "भैया सावधान हो जाओ। सावधान हो जाओ ।अन्यथा कितनों को संक्रमित करेगा बताने की जरूरत नहीं।


जरूरी है हम सब सजग हो जाएं। सावधान हो जाए। स्वयं को लॉक कर लें। तभी तो दुश्मन को लॉक कर पाएंगे।इससे पहले कि परिस्थिति हमारे खिलाफ हो, हमें सावधान हो जाना है। मानवता घायल है। सामाजिकता कमरे में घुट कर दम तोड़ रही है ।यही नहीं ,मुर्दो से भी उनका सम्मान छीन लिया इस जालिम दुश्मन ने । कई देश ऐसे हैं जहां संक्रमित लाशों को कंधा देने के लिए लोग नहीं मिल रहे हैं। ऐसा हृदय विदारक दृश्य मानव इतिहास में किसी ने कभी नहीं देखा होगा। पहले हम दूसरे देश से जुड़ने वाली सीमाओं को सील करते थे पर आज हम अपने देश के अंदर स्थित सभी राज्यों की सीमाएं  सील करने पर मजबूर हैं।कभी ऐसे दिन भी आएंगे, किसने सोचा था?पूरे विश्व में जिंदगी की रफ्तार थम सी गई है। जो जहां है, वहीं थथम सा गया है ।यातायात के साधनों को जाम कर दिया गया है, ताकि दुश्मन किसी के कंधे पर सवार होकर देश के दूसरे कोने में, दूसरे नागरिकों को हताहत ना कर पाए ।समस्याओं का सतत  सामना करने वाला मानव आज जैसी स्थिति में पहले कभी नहीं आया था। सरकारी प्रयास सराहनीय है ।हम और आप भी अपनी जिम्मेदारी निष्ठा से निभाए। हम सब सजग सेनानी का किरदार निभा सकते हैं ।बच्चे,बूढ़े, जवान ,सभी नर नारी इस अनोखे युद्ध के सेनानी हैं। यकीनन हम इस अनोखे युद्ध को जीत सकते हैं ।अवश्य जीतेंगे ।

इस युद्ध से जुड़ी कुछ बातें हम जानते हैं। कुछ नहीं जानते हैं। मसलन हम जानते हैं कि युद्ध हम ही जीतेंगे। हर हाल में जीतेंगे। जीत मनुष्यता की ही होगी। पर हम यह नहीं जानते हैं कि यह जीत कब होगी?इसकी और कितनी कीमत चुकानी होगी?हां, युद्ध समाप्ति के बाद जब आंकड़ा सामने आएंगे तो पता चलेगा कि हमने क्या खोया? क्या पाया? अच्छे बुरे अनुभवों के साथ युद्ध सदियों तक याद किया जाएगा। विशेष कारणों के कारण हमेशा याद किया जाएगा । एक अद्भुत युद्ध जो जनसहयोग से जीता जाएगा।जिसमें छोटे बड़े सभी नागरिक एकजुट होकर मोर्चा संभाले।बहने और बेटियां तो जन्म से ही कमरे में कैद रहने का प्रशिक्षण लेती हैं, इस बार पुरूष भी इस प्रशिक्षण में जबरन शामिल किए गए।कमरे में बंद होकर दुश्मन को परास्त किया जाने वाला यह युद्ध  मानव  इतिहास में अमर हो जाएगा।

लेखक -मीरा सिंह "मीरा",डुमरांव, जिला- बक्सर

 


टिप्पणी पोस्ट करें

0 टिप्पणियां