कड़वाहट मीठी सी का लोकार्पण


मुरादाबाद।  साहित्यिक संस्था 'अक्षरा', 'सवेरा', 'अंतरा' एवं 'हिन्दी साहित्य सदन' के संयुक्त तत्वाधान में नवीन नगर स्थित डा. मक्खन मुरादाबादी के आवास पर लोकार्पण समारोह एवं कृति चर्चा का कार्यक्रम संपन्न हुआ जिसमें हिन्दी व्यंग्यकविता के महत्वपूर्ण  हस्ताक्षर डा. मक्खन मुरादाबादी की काव्य-कृति 'कड़वाहट मीठी सी' का लोकार्पण किया गया तथा लोकार्पण के अवसर पर साहित्यिक संस्था 'अक्षरा' की ओर से संस्था के संयोजक योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' द्वारा डॉ. मक्खन मुरादाबादी को सम्मान-पत्र भेंट कर 'अक्षरा साहित्य साधक सम्मान' से सम्मानित किया गया।


कवयित्री डॉ. प्रेमवती उपाध्याय द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से आरम्भ हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध नवगीतकार डॉ० माहेश्वर तिवारी ने कहा, "मक्खन मुरादाबादी रूढ़ अर्थों में छांदस कवि नहीं हैं लेकिन वह अपनी ध्वन्यात्मकता का प्रयोग करते हुए अपनी कविता का वितान मुक्त छंद में बुनते हैं।उनकी कविताएँ सामाजिक विसंगतियों पर करारी चोट करती हैं।" कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. आर. सी. शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कहा, "पुस्तक'कड़वाहट मीठी सी' की कविताओं में व्यंग्य को विसंगति के विरुद्ध शस्त्र की तरह इस्तेमाल नहीं किया गया है, बल्कि मक्खन जी की कविताओं में व्यंग्य स्वयं शस्त्र बन जाता है। उनकी कविताओं के कथ्य में व्यंग्य की ऐसी अंतर्धारा प्रवाहित होती है जो बाह्य प्रदर्शन से परे है।"


विशिष्ट अतिथि एवं मशहूर शायर श्री मंसूर 'उस्मानी' ने कहा, "मक्खन जी 1970 से कवि सम्मेलन के मंचों पर अपनी कविताओं के माध्यम से लोकप्रिय हैं। 50 वर्ष की कविता साधना के बाद आई उनकी कृति हिन्दी साहित्य में निश्चित रूप से अपना अलग स्थान बनाएगी और सराही जाएगी।"कार्यक्रम का संचालन कर रहे संस्था-अक्षरा के संयोजक योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने कहा, ''मक्खनजी की कविताओं में समाज और देश में व्याप्त अव्यवस्थाओं, विद्रूपताओं, विषमताओं के विरुद्ध एक तिलमिलाहट, एक कटाक्ष, एक चेतावनी दिखाई देती है, यही कारण है कि उनकी कविताओं में विषयों, संदर्भों का वैविध्य पाठक को पुस्तक के आरंभ से अंत तक जोड़े रखता है। नि:संदेह इस कृति की कविताएं संग्रहणीय हैं।"


वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अजय 'अनुपम' ने इस अवसर पर कहा, "मक्खन जी की कविताएँ समाज में, देश में व्याप्त विसंगतियों पर कटाक्ष करते हुए बिसंगतियों के लिए जिम्मेदार चेहरों को बेनकाब भी करती हैं और आईना भी दिखाती हैं।"सुप्रसिद्ध शायर श्री गगन भारती ने कहा, "मक्खन जी की कविताएं व्यंग्य की श्रेष्ठ कविताएं हैं जो उनके व्यक्तित्व की तरह सहज व सरल भाषा में कही गई हैं और पाठक के मन को छूती हैं।"


इसके अतिरिक्त डॉ. आसिफ हुसैन, शायर ज़िया ज़मीर, डॉ. मनोज रस्तोगी, डॉ. महेश दिवाकर, विशाखा तिवारी, डॉ.प्रेमवती उपाध्याय, अशोक विश्नोई, डॉ. अर्चना गुप्ता, कशिश वारसी, भोलाशंकर शर्मा, फक्कड़ मुरादाबादी, अक्षिमा त्यागी, अखिलेश शर्मा, आदि ने भी कृति के संदर्भ में विस्तारपूर्वक विचार व्यक्त किए तथा सर्वश्री काव्यसौरभ रस्तोगी, मयंक शर्मा, राजीव 'प्रखर', कौशल शलभ, धन सिंह, प्रशांत मिश्र, एम. पी. बादल जायसी, शैलेश भारतीय, खुशबू त्यागी आदि उपस्थित रहे।


कार्यक्रम के अंत में कृति के कवि डॉ. मक्खन मुरादाबादी ने एकल कविता-पाठ भी किया। उन्होंने अपनी रचनाएं पढ़ते हुए कहा -


"भूख, अभी तो एक समस्या है
 भविष्य में, भयंकर बीमारी बनेगी
 भूख से लड़ते इंसान की लाचारी बनेगी
 क्या कहा, आप रोज़ खाना खाते हो
 तभी तो आए दिन बीमार पड़ जाते हो
 अपनी औकात पहचान लो
 चादर जितनी है उतनी तान लो
 मंथली पाते हो न,
मंथली खाने की आदत डाल लो’"
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"तुम सवर्ण हो, अवर्ण हो तुम
 तुम अर्जुन हो, कर्ण हो तुम
 तुम ऊँच हो, नीच हो तुम
 तुम आँगन हो, दहलीज़ हो तुम
 तुम बहु, अल्पसंख्यक हो तुम
 तुम धर्म हो, मज़हब हो तुम
 कहने को तो नारों में भाई-भाई हो तुम
 पर असलियत में
 हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई हो तुम"


श्री प्रत्यक्ष त्यागी द्वारा आभार-अभिव्यक्ति के साथ कार्यक्रम विश्राम पर पहुँचा।