गांधी जी की पुण्यतिथि पर विक्रम विश्वविद्यालय में हुआ गांधी चेयर का शुभारंभ


उज्जैन। विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में गांधी जी की पुण्यतिथि पर गांधी चेयर का शुभारंभ और गांधी तुम्हें नमन पर केंद्रित विशिष्ट संगोष्ठी का आयोजन 30 जनवरी को प्रातः काल महाराजा जीवाजीराव पुस्तकालय परिसर में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर पुस्तकालय प्रांगण में सामूहिक मौन धारण किया गया एवं गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। प्रातः काल प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में गांधी चेयर एवं महाविद्यालयों में गांधी स्तम्भ का सामूहिक उद्घाटन भोपाल स्थित संत हिरदाराम शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के माननीय उच्च शिक्षा मंत्री श्री जीतू पटवारी जी के करकमलों से संयुक्त रूप से डिजीटली - प्रतीकात्मक सम्पन्न हुआ। विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय, उज्जैन के पूर्व कुलपति डॉ मोहन गुप्त थे। अध्यक्षता विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बालकृष्ण शर्मा ने की। आयोजन के विशिष्ट अतिथि कुलसचिव डा डी के बग्गा थे।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ मोहन गुप्त ने अपने उद्बोधन में कहा कि गांधी जी ने सत्य को आधार बनाकर व्यापक क्रांति की। उन्होंने भारतीय सनातन मूल्य परंपरा का राजनीति में सार्थक प्रयोग किया। उनकी दार्शनिक दृष्टि बहुत गहरी है। राम को उन्होंने व्यापक चेतना के रूप में अंगीकार किया है। वे आजीवन सर्व धर्म समभाव के प्रति समर्पित रहे। सभी धर्म एक हैं, यह उनका सबसे बड़ा संदेश है। गांधी जी के पास नैतिकता का बल था, जिससे शक्तिशाली राष्ट्र भी थर्राते थे। युगीन परिवर्तनों के बावजूद गांधी जी के विचार प्रासंगिक सिद्ध हो रहे हैं।



अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कुलपति प्रो बालकृष्ण शर्मा ने कहा कि गांधी जी पर संत और महात्मा जैसे विशेषण चरितार्थ होते हैं। गांधी जी में लोकोत्तरता थी। उन्होंने राम जैसे लोकोत्तर चरित्र का अनुकरण किया था। अंतिम क्षण में भी उनके आदर्श राम का नाम उनके मुख में था। गांधी जी को समूचा विश्व नमन करता है।  कुलसचिव डॉ डी के बग्गा ने कहा कि गांधी जी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि साधारण मनुष्य किस प्रकार असाधारण व्यक्तित्व के रूप में रूपांतरित होता है। उन्होंने जिन मूल्यों को पहले आत्मसात किया था, उन्हें ही जन जन के मध्य प्रसारित किया। अपने आत्मबल से उन्होंने एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत को खड़ा कर दिखाया।
आयोजन की पीठिका प्रस्तुत करते हुए कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कहा कि गांधी जी ने सत्य, अहिंसा और प्रेम जैसे शाश्वत मूल्यों के आधार पर भारतीय परंपरा का नव संस्कार किया। उन्होंने सुदूर अतीत से आती हुई भिन्न भिन्न दार्शनिक प्रणालियों और मान्यताओं के बीच समन्वय किया, जो आज सम्पूर्ण विश्व को नई रोशनी दे रहा है।  
नवस्थापित गांधी चेयर की संकल्पना का परिचय प्रभारी विभागाध्यक्ष डॉ नलिन सिंह पँवार ने दिया। मध्यप्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग द्वारा विक्रम विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में गांधी चेयर की स्थापना की गई है। विक्रम विश्वविद्यालय में गांधी चेयर के पट्ट का अनावरण अतिथियों द्वारा किया गया। 
विक्रम विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में गांधी जी के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन किया गया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार से सहायता प्राप्त संस्था जाग्रति नशामुक्ति केंद्र द्वारा नशा विरोधी प्रदर्शनी लगाई गई। सामाजिक न्याय विभाग के अंतर्गत कलापथक के कलाकारों द्वारा महात्मा गांधी के प्रिय भजन वैष्णव जन तो तेणे कहिए एवं रघुपति राघव राजाराम और नशा विरोधी गीत की प्रस्तुति की गई। दल के कलाकारों में शैलेंद्र भट्ट, सुश्री अर्चना मिश्रा, सुरेश कुमार, नरेंद्रसिंह कुशवाह, राजेश जूनवाल आदि शामिल थे। कार्यक्रम में कुलपति प्रो शर्मा ने उपस्थित जनों को नशा निषेध की शपथ दिलाई। डॉ प्रवीण जोशी ने गांधी अध्ययन केंद्र और गांधी चेयर के गांधी चिंतन पर केन्द्रित अपनी पुस्तक अतिथियों को भेंट की।
अतिथि स्वागत पूर्व कुलपति प्रो आर सी वर्मा, गांधी अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा, अधिष्ठाता, विद्यार्थी कल्याण डॉ आर के अहिरवार, डीसीडीसी प्रो डी एम कुमावत, प्रो शुभा जैन,  प्रो प्रेमलता चुटैल, प्रो गीता नायक, डॉ ज्योति उपाध्याय, डॉ नलिन सिंह पँवार, डॉ डी डी बेदिया आदि ने किया। आयोजन में प्रबुद्ध जनों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। आयोजन का संचालन हिंदी विभाग के डॉ जगदीश चंद्र शर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन छात्र कल्याण विभाग के अधिष्ठाता डॉ आर के अहिरवार ने किया।